*अनुच्छेद 360 वित्तीय आपातकाल एवम कोरोना महामारी* -गीतांजलि कश्यप
कोरोना वायरस से जूझ रहे देश को आ रही और आने वाली वित्तीय समस्याओं के सुलभ निपटान के लिए अनुच्छेद 360 को लागू किया जाना एक अच्छा कदम हो सकता है परंतु यह कहां,  किस स्तर पर और कैसे लागू किया जाए यह विचारणीय है। 

 

उल्लेखनीय है कि  संविधान के अनुच्छेद 360 में वित्तीय आपातकाल को परिभाषित किया गया  है, 

 

 आपातकाल का इतिहास-  

 

भारत में पूर्व में कभी भी वित्तीय आपातकाल लागू नहीं किया गया केवल 3 बार राष्ट्रीय आपातकाल लागू किए गए थे | सन 1962 में भारत चीन युद्ध के समय , 1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध के समय एवं जून 1975 में आंतरिक अव्यवस्था के कारण राष्ट्रीय आपातकाल लागू किए गए थे | तीनों ही समय में अर्थ व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही थी|


 

वित्तीय आपातकाल लागू करने की आवश्यकता क्यों है  ??

 

कई लोग कहेंगे कि जब संविधान निर्माण से आज तक कभी वित्तीय आपातकाल लागू नहीं किया गया तो अब इसे लागू करने की क्या आवश्यकता है , तो यहां मैं यह स्पष्ट करना चाहूंगी कि पूर्व में जो आपातकाल लगाए गए उस समय में अर्थव्यवस्था पूर्ण रूप से ठप नहीं हुई थी।

 

लॉक डाउन  लागू होने से आज की तारीख तक समस्त उद्योग चाहे वह बड़े हो या छोटे पूर्ण रूप से बंद है किसी भी प्रकार का कोई उत्पादन कार्य नहीं हो रहा केवल कृषि एवं फार्मा कंपनियों को छोड़कर। कृषि उत्पादन तो हो रहा है परंतु बाजार और मंडिया बंद होने के कारण एवम शहरी ग्रामीण सीमा क्षेत्र प्रतिबंधित होने के कारण इस क्षेत्र के लोग भी आर्थिक रूप से प्रतिबंध का सामना कर रहे हैं। वही रोजनदारी  पर काम करने वाले श्रमिक वर्ग भीषण समस्याओं का सामना कर रहे हैं जिसका परिणाम पलायन के रूप में लॉक डाउन के दौरान भी देखा गया है | 3 मई तक लॉकडाउन की अवधि बढ़ा दी गई है  | 

 

अब तक भारत में कोरोना के 35 हजार से अधिक मामले हो गए हैं जो निरंतर बढ़ते ही जा रहे हैं और कोरोना की कोई वैक्सीन या  इलाज अब तक कोई भी देश विकसित नहीं कर पाया जो पूर्ण रूप से कारगर साबित हो और यह कब तक विकसित होगा यह भी सरकार दावे से नहीं कह सकती। अतः 3 मई के बाद लॉक डाउन पूर्णतः समाप्त हो जाएगा ऐसा संभव नजर नहीं आता । आर्थिक गतिविधियां सुचारु रुप से एकदम से प्रारंभ हो जाएंगे ऐसा भी संभव नहीं है | कोरोना के इलाज में लगने वाले चिकित्सकीय उपकरणों एवं अच्छी श्रेणी की चिकित्सा सुविधा प्रदान करने हेतु  पूंजी की आवश्यकता अधिक है , यदि हम कोरोना से पूर्ण रुप से बाहर भी आ जाते हैं तब भी भारतीय अर्थव्यवस्था एवं जीडीपी को पुनः उसी स्तर पर लाने में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना होगा अतः इस महामारी के दौरान एवं इसके पश्चात यदि हमें आर्थिक रूप से मजबूती के साथ खड़े रहना है तो इसके लिए सरकार को अनुच्छेद 360 यानी वित्तीय आपातकाल को लागू करने पर विचार अवश्य ही करना चाहिए।

 

अब हम आपको यह बता दें कि अनुच्छेद 360 वास्तव में क्या-क्या प्रावधान करता है- 

 

वित्तीय आपात राष्ट्रपति द्वारा तब लागू किया जा सकता है जब भारत या उसके राज्य क्षेत्र के किसी भाग का वित्तीय स्थायित्व या साख संकट में हो  | वर्तमान में हमारा देश इस महामारी से बचाव के लिए रोजगार कारोबार बंद होने के कारण आमजन को पोषण और चिकित्सकीय सेवाएं प्रदान करने हेतु वित्तीय संकट से जूझ रहा है। कोरोना के कारण संपूर्ण अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है | स्वयं सरकार आर्थिक मदद की गुहार लगा रही है ऐसे में वित्तीय आपात की घोषणा करना एक सजगता पूर्ण और निराकरणकारी पहल होगी | 

 

वित्तीय आपात के प्रवर्तन के दौरान संघ की कार्यपालिका राज्य को वित्तीय औचित्य  संबंधी कतिपय विनिर्दिष्ट सिद्धांतों का पालन करने के लिए निर्देश दे सकते हैं साथ ही राष्ट्रपति भी संघ के संबंध में निर्देश दे सकते हैं |  यह निर्देश इस बारे में हो सकता है कि केंद्र या राज्य के कार्यकलापों के संबंध में सेवा करने वाले सभी व्यक्तियों के वेतन एवं भत्तों में कटौती कर दी जाए। इसमें उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीश भी शामिल होंगे।

 

 अब प्रश्न यह आता है कि यह कटौती किस प्रकार की जाए |कोरोना के कारण हो रही आर्थिक क्षति की पूर्ति हेतु केंद्र सरकार ने हाल ही में 02 वर्ष तक सांसद निधि समाप्त एवं सांसदों के वेतन भत्तों में प्रतिमाह  30% की कटौती  का कड़ा निर्णय लिया है,  जो  सराहनीय है। परंतु कोरोना से लड़ने में मजबूती से खड़े पुलिस प्रशासन एवं चिकित्सक  सरकार के अधीन सेवारत होने के कारण वित्तीय आपातकाल का सीधे तौर पर सामना करेंगे इस हेतु एक सुव्यवस्थित योजना की आवश्यकता है जैसे-

1- ए ग्रेड ऑफिसर्स के वेतन भत्ते अधिक होते हैं आज के संदर्भ में जमीनी जरूरतों की पूर्ति हेतु यदि इनके वेतन भत्तों में 30% की कटौती की जाए तो बहुत अधिक अंतर इनकी जीवन शैली एवं आवश्यकताओं पर नहीं पड़ेगा। 

 

 2 - बी ग्रेड या द्वितीय स्तर  के अधिकारियों के वेतन भत्ते में 20% की कटौती एवं तृतीय स्तर के अधिकारी कर्मचारियों के वेतन भत्तों में 10% की कटौती उचित होगी जिससे इन पर अत्यधिक आर्थिक प्रहार भी नहीं होगा एवं आधारभूत आवश्यकताएं भी आसानी से पूर्ण होंगी|

 

3- यह वित्तीय आपात संपूर्ण भारत पर या प्रभावित राज्यों पर जहां आमजन कोरोना से अत्यधिक पीड़ित हैं केवल वहां भी लगाया जा सकता है,  परंतु यदि यह संपूर्ण भारत पर लगाया जाता है तो पीड़ित राज्यों की आर्थिक स्थिति अन्य राज्यों के सहयोग से कोरोना पर विजय प्राप्ति के पश्चात भी पुनः शीघ्र गति से पटरी पर आ जाएगी| 

 

अब प्रश्न यह आता है कि यह कटौती कब और कितने समय हेतु की जाए , तो इसका जवाब यह है कि प्रारंभ में यह कटौती आरंभिक दो माह  तक की जाए उसके पश्चात परिस्थिति अनुरूप संसद में प्रस्ताव रख इसे आगे बढ़ाए जाने की कितनी आवश्यकता है इस पर विचार कर बहुमत से निर्णय लिया जाए कि वित्तीय आपात को और अधिक बढ़ाना है या समाप्त करना है।  

 

अंत में ,मैं सरकार से यह भी आग्रह करना चाहती हूं की इस प्रकार से प्राप्त धनराशि की निगरानी के लिए विशेष रूप से निष्पक्ष जांच करने हेतु कैग की अध्यक्षता में एक आयोग/समिति का भी गठन किया जाए जो इस कोष में  से खर्च  की गई राशि के औचित्य  का निर्धारण एवं निगरानी करें ।

साथ ही सरकार एवं केंद्र एवं राज्यों के अधिकारी कर्मचारियों से इन सुझावों पर ध्यान आकर्षण एवं सहयोग का निवेदन करती हूं,  साथ ही आम जनता से भी निवेदन करती हूं कि वह सरकार एवं  प्रशासन द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों का निष्ठा से पालन करें जिससे हमारा देश हमारा राज्य और हम कोरोना जैसी महामारी पर जल्द ही विजय प्राप्त कर पाए |

-गीतांजलि  कश्यप